साँप ने पिया बकरी का खून ...
वाह ! वाह !
..
साँप ने पिया बकरी का खून ...
गुड Afternoon! Good Afternoon! Good Afternoon!!
तेरे प्यार में पागल हो गया पीटर .. .
वाह! वाह!
..
तेरे प्यार में पागल हो गया पीटर ...
अब हीरो होंडा Splendor, 80 km प्रति लीटर .. !!
Bahaar आने से पहले फिजा आ गयी .. .
.वाह! वाह!
..
Bahaar आने से पहले फिजा आ गयी ...
फूल को खिलने से पहले बकरी खा गयी .. !!
आत्मा छोड़ गयी शरीर पुराना
वाह! वाह!
..
आत्मा छोड़ गयी शरीर पुराना ...
दीदी तेरा देवर दीवाना .. !
Yashomati Maiyya Se Bole Nandlala ...
वाह! वाह!
..
Yashomati Maiyya से Bole Nandlala ...
"माँ, Tata Sky Laga Daala To Life Jhingalala ..!!"
Rajesh Saini
लोग हमसे मिल के क्या ले जायेंगे?
सिर्फ़ जीने के अदा ले ले जाएँगे
दो घड़ी बैठेंगे तेरे पास हम
और बातो का मजा ले जाएँगे ।
सिर्फ़ जीने के अदा ले ले जाएँगे
दो घड़ी बैठेंगे तेरे पास हम
और बातो का मजा ले जाएँगे ।
Friday, July 9, 2010
Tuesday, October 6, 2009
Friends
Friendship is not about “I m sorry “ its about “abbe teri galti hai “
Friendship is not about “I m there for u “ its about “kahan marr gaya saale “
Friendship is not about “I understand “ its about “sab teri wajah se hua manhus“
Friendship is not about “I care for u “ its about “kamino tumhe chhod ke kahan jaunga “
Friendship is not about “I m happy for ur success “its about “chal party de saale“
Friendship is not about “I love that girl“ its about “saalo izzat se dekho tumhari bhabhi hain “
Friendship is not about “R u coming for outing tomorrow “ its about “ nautanki nahi, hum kal bahar ja rahe hai “
Friendship is not about “Get well soon “ its about “ Itna piyega toh yehi hoga“
Friendship is not about “All the best for ur career“its about “bahut hua, abhi toh switch mar saale“
मैं आज भी उन रास्तों पे चल रहा हूँ
ये कतरे उस वक़्त की कतरने हैं जब हम एक राह पर दो कदम चाल कर खो गए थे .....
आदमी को अपने ऊपर इतना भरोसा होता है की वो जान बूझ कर गर्त में उतरता है. जब वापस आने की बात होती है तो वहाँ के प्रपंचों में ऐसा फंसता है की फिर बहार आना संभव नहीं रह जाता. कुछ यही सोच थी मेरी जब ये कतरने लिखी गयी थी.
मैं आज भी उन रास्तों पे चल रहा हूँ
जिनपर तुमने कभी पाँव रखे थे.
गर्म हवाओं से वो निशाँ तो मिट गए
पर मैं अब भी उन निशानों को ढूँढने की नाकाम कोशिश करता हूँ.
कुछ वक़्त की रफ़्तार तेज़ थी और कुछ मैं भी धीमा था,
की चलते चलते तुम कहाँ निकल गए
ये मुझे पता भी ना चला.
फिर भी मैं उन रास्तों पे चल रहा हूँ
की जिनपर तुमने कभी पाँव रखे थे.
ये गर्म हवाएं अब भी
कभी तेरी भीनी खुशबू लाती हैं
और मैं चैन की सांस लेता हूँ
के शायद तुम यही हो.
वो जब एक बार तुमने मुझे आवाज दी थी
और मैं तुम्हारा दीवाना हो गया था.
मैं जानता हूँ की तुम मेरे कभी थे ही नहीं.
फिर भी मैं उन रास्तों पे चल रहा हूँ
की जिनपर तुमने कभी पाँव रखे थे.
मैं हवाओं की कश्ती पे सवार
अपनी ही धुन में मुस्कुराता हुआ
सपनो की दुनिया में कही जा रहा था
और तुमने मुझे आवाज दी थी.
तेरे बेपनाह हुस्न ने मुझे
उन रास्तों में छोड़ दिया जहां से वापस आना
शायद मेरे लिए मुमकिन नहीं था.
इसलिए मैं आज भी मैं उन रास्तों पे चल रहा हूँ
की जिनपर तुमने कभी पाँव रखे थे.
Saturday, March 28, 2009
वित्तमंत्री से इंटरव्यू
वित्तमंत्री से मिले, काका कवि अनजान
प्रश्न किया ‘क्या चांद पर रहते हैं इंसान’?
रहते हैं इंसान, मारकर एक ठहाका
कहने लगे कि तुम बिल्कुल बुद्धू हो ‘काका’
अगर वहां मानव होते हम चुप रह जाते
अब तक सौ दो सौ करोड़ कर्जा ले आते।
प्रश्न किया ‘क्या चांद पर रहते हैं इंसान’?
रहते हैं इंसान, मारकर एक ठहाका
कहने लगे कि तुम बिल्कुल बुद्धू हो ‘काका’
अगर वहां मानव होते हम चुप रह जाते
अब तक सौ दो सौ करोड़ कर्जा ले आते।
Friday, November 7, 2008
ख्वाहिशों में अपना दिल न लगाओ-हिंदी शायरी
आदमी की ख्वाहिशें
उसे जंग के मैदान पर ले जातीं हैं
कभी दौलत के लिए
कभी शौहरत के लिए
कभी औरत के लिए
मरने-मारने पर आमादा आदमी
अपने साथ लेकर निकलता है हथियार
तो अक्ल भी साथ छोड़ जाती है
ख्वाहिशों के मकड़जाल में
ऐसा फंसा रहता आदमी जिंदगी भर
लोहे-लंगर की चीजों का होता गुलाम
जो कभी उसके साथ नहीं जातीं हैं
जब छोड़ जाती है रूह यह शरीर
तो समा जाता है आग में
या दफन हो जाता कब्र में
जिन चीजों में लगाता दिल
वह भी कबाड़ हो जातीं हैं
ख्वाहिशें भी एक शरीर से
फिर दूसरे शरीर में घर कर जातीं हैं
.................................
ख्वाहिशों में अपना दिल न लगाओ
वह कभी यहां तो कभी वहां नजर आतीं हैं
एक जगह हो जाता है काम पूरा
दूसरी जगह नाच नचातीं हैं
किसी को पहुंचाती हैं शिखर पर
किसी को गड्ढे में गिरातीं हैं
उसे जंग के मैदान पर ले जातीं हैं
कभी दौलत के लिए
कभी शौहरत के लिए
कभी औरत के लिए
मरने-मारने पर आमादा आदमी
अपने साथ लेकर निकलता है हथियार
तो अक्ल भी साथ छोड़ जाती है
ख्वाहिशों के मकड़जाल में
ऐसा फंसा रहता आदमी जिंदगी भर
लोहे-लंगर की चीजों का होता गुलाम
जो कभी उसके साथ नहीं जातीं हैं
जब छोड़ जाती है रूह यह शरीर
तो समा जाता है आग में
या दफन हो जाता कब्र में
जिन चीजों में लगाता दिल
वह भी कबाड़ हो जातीं हैं
ख्वाहिशें भी एक शरीर से
फिर दूसरे शरीर में घर कर जातीं हैं
.................................
ख्वाहिशों में अपना दिल न लगाओ
वह कभी यहां तो कभी वहां नजर आतीं हैं
एक जगह हो जाता है काम पूरा
दूसरी जगह नाच नचातीं हैं
किसी को पहुंचाती हैं शिखर पर
किसी को गड्ढे में गिरातीं हैं
अपने दिल को कहाँ बहलाएँ हम-हिंदी शायरी
मन जिधर ले जाये उधर ही हम
रास्ते में अंधेरा हो या रौशनी
हम चलते जायें पर रास्ता
होता नही कभी कम
अपनी ओढ़ी व्यग्रता से ही
जलता है बदन
जलाने लगती है शीतल पवन
महफिलों मे रौनक बहुत है
पर दिल लगाने वाले मिलते है कम
जहां बजते हैं
भगवान् के नाम पर बजते हैं जहाँ ढोल
वहीं है सबसे अधिक होती है पोल
अपने दिल को कहां बहलाएं हम
रास्ते में अंधेरा हो या रौशनी
हम चलते जायें पर रास्ता
होता नही कभी कम
अपनी ओढ़ी व्यग्रता से ही
जलता है बदन
जलाने लगती है शीतल पवन
महफिलों मे रौनक बहुत है
पर दिल लगाने वाले मिलते है कम
जहां बजते हैं
भगवान् के नाम पर बजते हैं जहाँ ढोल
वहीं है सबसे अधिक होती है पोल
अपने दिल को कहां बहलाएं हम
खुशी हो या गम-हिंदी शायरी
अपनी धुन में चला जा रहा था
अपने ही सुर में गा रहा था
उसने कहा
‘तुम बहुत अच्छा गाते हो
शायद जिंदगी में बहुत दर्द
सहते जाते हो
पर यह पुराने फिल्मी गाने
मत गाया करो
क्योंकि इससे तुम्हारे दर्द पर
किसी को रोना नहीं आयेगा
क्यों नहीं नये गाने गाते
शोर सुनकर लोगों के
हृदय में भावनाओं का ज्वार आयेगा
ऐसे ही आंसू बहाने लगेंगे
समझ में कुछ नहीं आयेगा
तुम्हारें अंदर खुशी हो या गम
उसे बेचने का काम शुरू कर दो
क्यों कमाने से हाथ धोये जाते हो
...........................
अपने ही सुर में गा रहा था
उसने कहा
‘तुम बहुत अच्छा गाते हो
शायद जिंदगी में बहुत दर्द
सहते जाते हो
पर यह पुराने फिल्मी गाने
मत गाया करो
क्योंकि इससे तुम्हारे दर्द पर
किसी को रोना नहीं आयेगा
क्यों नहीं नये गाने गाते
शोर सुनकर लोगों के
हृदय में भावनाओं का ज्वार आयेगा
ऐसे ही आंसू बहाने लगेंगे
समझ में कुछ नहीं आयेगा
तुम्हारें अंदर खुशी हो या गम
उसे बेचने का काम शुरू कर दो
क्यों कमाने से हाथ धोये जाते हो
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